वैसे भी मिट्टी के दीपक सा
है ये जीवन
तेल खत्म
खेल खत्म ....
इससे पहले के जीवन का खेल ख़त्म हो किसी कमजोर व निर्बल का सहारा बनो। अन्याय का प्रतिकार करो। स्वार्थी नहीं, सारथी बनों।
मै मानता हूँ पहली बार रक्तदान करने में डर लगना स्वाभाविक है। लेकिन एक बार रक्तदान करने के बाद हमें जो प्रसन्नता, निडरता और अपने आप पर गौरव महसूस होता हैं। और जो मन के साथ-साथ कहीं अंदर अंतरात्मा को शांति व सकून की अनुभूति होती है। अगर हमें इसका सुखद आनंद लेना है तो उसके लिए जीवन मे एक बार रक्तदान करना आवश्यक हैं। रक्तदान के बिना हम इसका आनंद नहीं ले सकते है। आप लोगो ने देखा होगा पूरे विश्व मे कितने ही अनगिनित लाखो- करोड़ो लोगो ने रक्तदान शिविरों में और ब्लड बैंक में पहुंच कर रक्तदान किया हैं। लेकिन आज तक अपने ये कभी नही सुना होगा के रक्तदान करने से कोई व्यक्ति मरा है, लेकिन हमारे या आपके रक्तदान नहीं करने से कोई न कोई व्यक्ति अवश्य मर सकता है। यदि आप स्वस्थ हैं तो किसी के जीवन के शिल्पकार बने व खुशियां बांटे। इसलिए थोड़ा सोच-विचार करें औऱ किसी की जीवनरक्षा का अन्तिम........निर्णय लें ।। धन्यवाद !!
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