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| अपूर्व घोष महासचिव (एफबीडीओआई) |

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| कार्ल लैंडस्टीनर |
विश्व रक्तदाता दिवस पूरे विश्व मे प्रति वर्ष 14 जून को मनाया जाता है। यह दिन मानव शरीर विज्ञान में नोबल पुरस्कार प्राप्त विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टीनर की याद में रक्तदान दिवस के रूप में मनाया जाता है। 14 जून 1868 को इस महान वैज्ञानिक का जन्म हुआ था। इनके द्वारा मानव रक्त में उपस्थित रक्तकणों का ए, बी और ओ समूह में वर्गीकरण किया गया था। इस वर्गीकरण ने चिकित्सा विज्ञान को मानव जीवन सुरक्षित करने में जो प्रेरक व महत्पूर्ण योगदान दिया। उस महत्वपूर्ण योगदान के लिए कार्ल लैंडस्टीनर को सन् 1930 में नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
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| अपूर्व घोष महासचिव (एफबीडीओआई) |
विज्ञान की खोज ने जहां धरा पर तरक्की के असंख्य आयाम लिखे हैं, वहीं कुछ चीजे आज भी ईश्वर ने अपने पास ही रखी हुई है। जिसका विकल्प ढूँढ पाना पूरी दुनिया के प्राणी मात्र के लिए आज भी एक सपना है। कहते हैं कि रक्त का कोई विकल्प नहीं है, इसी प्रकार के प्रेरक उद्देश्यों से यदि हमारे रक्त की चंद बूंदों से किसी के घर का चिराग बुझाने से बच सकता है। तो आइए मानवता की निस्वार्थ सेवा में अपना प्रेरक योगदान दें कर मानवता का परिचय दें....... और रक्तदान करें। किसी भी रक्तदान शिविर में दिया गया रक्त "गुप्तदान" के साथ-साथ सर्वोत्तम "महादान दान" की श्रेणी में आता है वैसे ही जो रक्त हमें हमारे घर-परिवार या रिश्तेदारों को देना पड़े, उसे दान नहीं बल्कि दुनियादारी निभाना कहते हैं। इसी उदेश्य को देखते हुए फेडरेशन ऑफ ब्लड डोनर ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया के प्रेरक पर्यास से तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया है।रक्तदान कीजिए,
शिविर लगाइए,
इस तरह पूरी दुनिया में,
मानवता के मन्दिर बनाइए.....
भारत के कई प्रतिष्ठित सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों के श्रेष्ठ व् वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा स्वैच्छिक रक्तदान की कार्यशाला में स्वैच्छिक व सुरक्षित रक्तदान के लिए इस कार्यक्रम में सम्मिलित रक्तदाताओं व समाजसेवी संस्थाओं को प्रेरित, प्रोत्साहित व् प्रशिक्षित किया जाएगा ।

ये केवल मात्र हमारा परिधान ही नहीं है, बल्कि इसमें हमारे श्रेष्ठ दान - धर्म वाली समृद्ध संस्कृति, परिवेश, संस्कार और मिट्टी की महक के साथ खून व जनून की महक भी विद्यामान है।
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असहाय लोगों की निस्वार्थ भाव से की गई सेवा-सहायता ईश्वर की सच्ची भक्ति व आराधना है। ईश्वर की इस आराधना में जो कुछ भी स्वेच्छा से नि:स्वार्थ रूप दान किया जाता है, सही मायने में वही दान श्रेष्ठ दान की श्रेणी में आता है।
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| जीवन सुरक्षा कवच |
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तीन दशक से .............निरंतर व् तत्पर !!
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जिंदगी जियो ऐसी सदा दिलशाद रहे।
मैं न रहूँगा, तुम न रहोगे,
फिर भी रहेगी .................. निशानियाँ ॥💓
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| !! जय हिन्द !! जय रक्तदाता!! |

✍ Rgds... BLOOD DONOR Nk Shimla !!🙏









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